Friday, January 11, 2019

त्योहारों की डिजिटल ग्रिटिंग बनाना सीखें 5 सेकेंड में !!


नमस्कार दोस्तों

अपने पसंद वाले त्यौहार जैसे शुभ दिपावली, होली, नवरात्र, दशहरा, स्वतंत्रता दिवस, रक्षाबंधन, ईद मुबारक, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, शुभ प्रात और शुभ शंध्या आदी जैसे त्योहारों के सुंदर ग्रीटिंग्स अपने दोस्तों को शेयर करने के लिए निचे ग्रीन कलर के festival99.epizy.com या Share बटन पर क्लिक किजिए, आपको त्योहारों की शुभकामनाएँ के नाम से एक ब्लॉग दिखाई देगा जिसमें अलग अलग सभी त्योहारों का नाम दिखाई देगा जैसा कि आप नीचे के चित्र में देख रहे हैं बस आप अपने मन वांछित त्योहार के नाम पर क्लिक किजिए और आपके स्क्रीन पर उस त्यौहार का डिजिटल ग्रीटिंग्स दिखाई देगा अब उस डिजिटल ग्रीटिंग्स में अपना नाम लिखकर अपने दोस्तों को शेयर कर सकते है,
और अगर आप समझ नहीं पा रहे हों तो निचे YouTube विडिओ को देखकर बनाना सिख सकते है !!


Friday, October 5, 2018

Happy Dashahra

दशहरा उत्सव क्या है, दशहरा शब्द का क्या मतलब है, क्यों किया जाता है दशहरा के दिन रावण के पुतले का दहन, और क्यों करते हैं दशहरे के दिन माँ दुर्गा की पूजा आराधना तथा क्यों होता है इस दिन रामलीला का कार्यक्रम इस आर्टिकल में.आपको इन्ही सवालों के जवाब मिलेगा वो भी बिलकुल संक्षिप्त में क्योकि मैं जानता हूँ आपका समय कितना कीमती है इसलिए आपके कीमती समय को ध्यान में रखते हुए मैं बिलकुल कम समय में आपको पूरी जानकारी देने का प्रयास करूँगा, और आप कम समय में जान और समझ पाएँगे,
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नमस्कार दोस्तों, इस आर्टिकल में सुंदर डिज़ाइन वाले ग्रीटिंग्स को सिर्फ आपके लिए डाल रहा हूँ, इस त्योहार को क्यों मनाते हैं संक्षेप में इस लेख से समझ सकते हैं तथा अपने दोस्तों और परिवार के सभी सदस्यों को बड़ी ही आसानी से ग्रीटिंग्स में अपना नाम लिखकर सेंड कर सकते हैं,  ग्रीटिंग्स भेजने के लिए Share बटन पर क्लिक कीजिए,

अपने पसंद वाले त्यौहार जैसे शुभ दिपावली, होली, नवरात्र, दशहरा, स्वतंत्रता दिवस, रक्षाबंधन, ईद मुबारक, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, शुभ प्रात और  शुभ शंध्या आदी जैसे त्योहारों के सुंदर ग्रीटिंग्स अपने दोस्तों को शेयर करने के लिए निचे ग्रीन कलर के festival99.epizy.com पर क्लिक किजिए,

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Happy Dashahra
हैप्पी दशहरा



दशहरा शब्द का अर्थ होता है दस+हारा दश = दशानन रावण के दस सर होने के कारन उसे दशानन कहा गया है और हारा = हारना इस दिन भगवान श्री राम के द्वारा युध में रावण की हार हुई थी दशानन हारा था  इसलिए इस दिन को हम दशहरा उत्सव मानते हैं इस दिन को हम विजयदशमी भी कहते हैं दशहरा भारत का एक बहुत ही प्रमुख त्यौहार है जिसे पूरे भारतवर्ष में बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है, विजय दसमी प्रत्येक वर्ष आश्विन माह के शुक्ल पक्ष, दशमी तिथी को मनाया जाता है, इसी दिन भगवन श्री राम नें पापी रावण का वद्ध करके सत्य और धर्म स्थापित किए थे यह असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का दशमी है अत: हम इस दिन को विजयदशमी के नाम से जानते हैं,


भगवन श्री राम, लक्ष्मण और माता सीता जब वन में प्रवेश करते हैं तो पंचवटी में एक कुटीया बना कर रहने लगते हैं वन में माता सीता को एक सोने का मृग दिखाई देता है जो की रावण के द्वारा भेजा गया एक राक्षस "मारीच" था और मृग का रूप ले कर आया था, माता सीता प्रभु राम से मृग को पकड़कर लाने की आग्रह करतीं है, अपनी पत्नी का मान रखते हुए श्रीराम मृग के पीछे भागते हैं जब बहुत देर बाद वन से एक करूण आवाज आता है तो माता सीता डर जाती हैं और लक्ष्मण को राम के पीछे भेजती हैं माता सीता को अकेले पाकर रावण माता सीता का हरण कर के लंका ले जाता है, तो श्री राम और लक्ष्मण वानर राज सुग्रीव एवं हनुमान का सहायता लेकर लंका में जाकर रावण के कुल का विनाश कर देते हैं और रावण का वद्ध कर के सत्य और धर्म की रक्षा करते हैं रावण रूपी अधर्मी पर मिले विजय को ही विजयादशमी, और रावण की हार को ही  दशहरा कहते हैं !!

#दशहरा की सुभकामनाएँ अपने मित्रों को देना चाहते हैं तो Share बटन पर क्लिक किजिए  !


एक पौराणिक  मान्यता यह है की एक राक्षस था महिषासुर, जिसने भगवान शिव की कठोर उपासना कर के वरदान स्वरुप कुछ शक्तियां मांग ली थी, इन्हीं शक्तियों की वजह से स्वयं शिव भी उन्हें मारने में असक्षम हो गए, महिषासुर ने चारों तरफ आतंक फैला रखा था और सभी देवताओं को भयभीत कर रखा था, सभी देवता उनसे परेशान थे, इसलिए सभी देवता भगवान् ब्रम्हा, विष्णु, और महेश के पास गये और महिशासुर से मुक्ति की कामना की, तब सभी देवताओं तथा ब्रम्हा, विष्णु, और महेश के आवाहन पर मां आदिसक्ति का अवतरण मां 'दुर्गा' के रूप में हुआ और उन्होने महिषासुर का वध कर संसार को भय मुक्त किया, माँ दुर्गा के अनेक नाम है इसमें से इनका एक नाम शक्ति भी है, 
                                      
माँ दुर्गा का अवतरण महिषासुर के वध हेतु ही हुआ था और माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध कर देवताओं सहित सारी सृष्टि को महिषासुर के आतंक से मुक्त किया, तब से लेकर आज तक माँ दुर्गा की पूजा आराधना दशहरे के दिन की जाती है जिससे की असुरी सक्तियों से माँ दुर्गा हमारी रक्षा करती रहें !! 

विजय दसमी का यह त्यौहार अच्छाई की बुराई पर, सत्य की असत्य पर विजय का प्रतिक है, यह हमें सन्देश देता है की बुरा व्यक्ति चाहे कितना भी बलवान व प्रभावशाली क्यों ना हो उनका अंत सुनिश्चित है, मृत्यु पर विजय पाने वाले रावण का अंत कर भगवान श्री राम ने असत्य पर सत्य की विजय प्राप्त की, और हमें एक सन्देश दिया की कभी भी हमें असत्य और अधर्म रूपी रावण से डर कर भागना नहीं चाहिए,

विजयदशमी से कई दिन पूर्व दशहरे की तैयारियां शुरू हो जाती है, देश भर में जगह जगह रामलीला का आयोजन होता है, रामलीला में श्री राम के जीवन प्रसंगों का प्रदर्शन होता है, लोग बड़ी ही श्रधा व विस्वास से रामलीला को देखते हैं, रामलीला के माध्यम से हम भगवान श्री राम के आदर्शों और चरित्र के दर्शन कर पाते हैं, इस वर्ष की दशहरा आपके और आपके परिवार लिए मंगलमय हो,                            II जय माता दी II

Saturday, September 22, 2018

Happy Gandhi Jayanti

गाँधी जयंती क्यों मनाया जाता है, महात्मा गाँधी के बचपन का नाम क्या था, क्यों उन्हें महात्मा की उपाधि मिली है, और उन्हें हम राष्ट्रपिता एवं बापू क्यों कहते हैं, इस आर्टिकल से इन्हीं सवालों का जवाब संक्षिप्त में जान पाएँगे और गाँधी जयंती का एक सुंदर सा डिजिटल ग्रिटिंग्स अपने मित्रों को सेंड करेंगे,
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नमस्कार दोस्तों, इस आर्टिकल में सुंदर डिज़ाइन वाले ग्रीटिंग्स को सिर्फ आपके लिए डाल रहा हूँ, इस त्योहार को क्यों मनाते हैं संक्षेप में इस लेख से समझ सकते हैं तथा अपने दोस्तों और परिवार के सभी सदस्यों को बड़ी ही आसानी से ग्रीटिंग्स में अपना नाम लिखकर सेंड कर सकते हैं,  ग्रीटिंग्स भेजने के लिए Share बटन पर क्लिक कीजिए,

अपने पसंद वाले त्यौहार जैसे शुभ दिपावली, होली, नवरात्र, स्वतंत्रता दिवस, रक्षाबंधन, ईद मुबारक, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, शुभ प्रात और  शुभ शंध्या आदी जैसे त्योहारों के सुंदर ग्रीटिंग्स अपने दोस्तों को शेयर करने के लिए निचे ग्रीन कलर के festival99.epizy.com पर क्लिक किजिए,

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महात्मा गाँधी जयंती की ग्रीटिंग्स शेयर कीजिए


महात्मा गाँधी का जन्म गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान में 2 अक्टूबर 1869 को हुआ था, उनके पिता करमचंद गाँधी सनातन धर्म की पंसारी जाति के थे, उनके बचपन का नाम मोहनदास था, लेकिन उनके पिता के नाम पर उनका नाम मोहनदास करमचंद गाँधी पड़ा, उनके पिता ब्रिटिश राज के समय काठियावाड की एक छोटी सी रियासत पोरबंदर के दीवान थे, उनकी माता का नाम पुतलीबाई था, वे परनामी वैश्य समुदाय की थी, पुतलीबाई करमचंद गाँधी की चौथी पत्नी थी, उनकी पहली तीन पत्नियों की पहले ही मृत्यु हो गयी थी,
पोरबंदर से उन्होंने मिडिल और राजकोट से हाई स्कूल की शिक्षा ली, मई 1883 में 13 वर्ष की उम्र में उनका विवाह कस्तूरबा माखनजी से कर दिया गया, उस समय बाल विवाह का प्रचलन था,

19 वर्ष की आयु में वे 4 सितम्बर 1888 को "युनिवेर्सिटी कॉलेज लन्दन" में कानून की पढाई करने के लिए लन्दन चले गए, बचपन से ही उनके पिता उन्हें बैरिस्टर बनाना चाहते थे, 1875 ई में थियोसोफिकल सोसाइटी की स्थापना की गयी थी इसे बोद्ध धर्म एवं सनातन धर्म के अध्ययन के लिए समर्पित किया गया था, जब गाँधी जी इस संस्था से जुड़े तो उन लोगों ने उन्हें श्रीमद् भगवद्गीता पढने के लिए प्रेरित किया, 1893 में वे एक भारतीय फर्म के करार के तहत दक्षिण अफ्रीका में वकालत करने चले गए, इस यात्रा के दौरान उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा उनके पास प्रथम श्रेणी का टिकट होने के बावजूद उन्हें तृतीय श्रेणी के रेल डिब्बे में सफ़र करना पड़ा, वहां जाकर उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में भारतिये समुदाए के लोगों के नागरिक अधिकार के लिए सत्याग्रह किया उन पर हो रहे अन्याय के खिलाफ अंग्रेजी साम्राज्य से भारतियों के सम्मान के लिए प्रश्न उठाई,

1915 में वे दक्षिण अफ्रीका से भारत लौट आए, 1918 में महात्मा गाँधी ने सबसे पहला चंपारण सत्याग्रह और खेडा सत्याग्रह किया उसके बाद उन्होंने ग्रामीणों के लिए गावों की सफाई स्कूल और अस्पताल बनवाने के लिए और सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने के लिए ग्रामीणों का नेतृत्व किया परन्तु ब्रिटिश पुलिस ने उन्हें अशांति फ़ैलाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया और उन्हें उस प्रान्त को छोड़ने के लिए आदेश दिया इस घटना के बाद हजारों की तादाद में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया जेल और पुलिस स्टेशन के बाहर रैलियां निकाली गयी इस संघर्ष के दौरान ही सबसे पहले राजवैध जीवराम कालिदास ने गाँधी जी को महात्मा गाँधी के नाम से संबोधित किया और 6 जुलाई 1944 को सुभास चन्द्र बोस ने रंगून रेडियो से गाँधी जी के नाम जारी प्रसारण में उन्हें रास्ट्रपिता कहकर संबोधित किया और आजाद हिन्द फ़ौज के लिए आशीर्वाद माँगा, उसके बाद आम जनता भी गाँधी जी को बापू और रास्ट्रपिता महात्मा गाँधी के नाम से संबोधित करने लगे,

गाँधी जी ने असहयोग आन्दोलन, अहिंसा तथा शांतिपूर्ण प्रतिकार को अंग्रेजों के खिलाफ शस्त्र के रूप में प्रयोग किया,चौरी चोरा आन्दोलन, स्वराज और नमक सत्याग्रह आन्दोलन, उसके बाद गाँधी जी ने कांग्रेस पार्टी में रहकर भारत छोडो आन्दोलन नामक विधेयक को चलाकर अंग्रेजो को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया परन्तु उन्होंने कभी भी अहिंसा और सत्य धर्म को नही छोड़ा, वे श्रीमद् भगवद्गीता को हमेसा अपने साथ रखते थे और शुद्ध शाकाहार भोजन करते थे और आत्मशुद्धि के लिए लम्बी उपवास रखते थे, साबरमती आश्रम में रहते थे जिसे उन्होंने गुजरात के अहमदाबाद में साबरमती नदी के किनारे बनाया था ऐसा माना जाता है की पौराणिक कथाओं के दधिची ऋषि का आश्रम भी यहीं पर था, वे स्वयं चरखे में सूत कातकर बनाया हुआ धोती पहनते थे, उन्होंने सभी कांग्रेसियों और भारतियों को अहिंसा के साथ ‘करो या मरो’ का नारा दिया, इस दौरान उन्हें राजद्रोह के लिए गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें छ: वर्ष की सजा भी हुई परन्तु आँतों के ऑपरेसन के लिए उन्हें दो वर्ष में ही रिहा कर दिया गया,

आजादी की लडाई में महात्मा गाँधी के साथ पंडित जवाहरलाल नेहरु, सरदार वल्लभ भाई पटेल, भगत सिंह, सुभाषचन्द्र बोस, चंद्रशेखर आज़ाद, लाला लाजपत राय, लाल बहादुर शास्त्री, मंगल पाण्डेय,रानी लक्ष्मीबाई, रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां आदि स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया और अंत में 15 अगस्त 1947 को हमें आज़ादी मिली,



परन्तु हमारे भारत के एक मुस्लिम नेता मोहम्मद अली जिन्ना की ज़िद के कारण भारत का बंटवारा करना पड़ा जिसके कारन पाकिस्तान को भारत से अलग कर दिया गया यह बात नाथूराम गोडसे जो की एक स्वतंत्रता सेनानी और हिन्दू महासभा संघ के एक सक्रिय सदस्य भी थे, उसने इस बात के लिए गाँधी जी को जिम्मेदार ठहराया और 30 जनवरी 1948 को जब महात्मा गाँधी प्रातःकाल पूजा के लिए निकले उसी समय नाथूराम गोडसे ने बापू पर लगातार 3 गोलियाँ चलायी जिससे गाँधी जी की उसी समय मृत्यु हो गयी, वे उस समय 79 वर्ष के थे, बापू के मुख से अंतिम शब्द ‘हे राम’ निकला था, बापू हमारे बीच नही रहे,

2 अक्टूबर 1869 ई में महात्मा गाँधी का जन्म हुआ था इसलिए भारत में इस दिन को गाँधी जयंती और पुरे विश्व में अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के नाम से मनाया जाता है और भारत में सभी स्कूल, कॉलेज एवं सरकारी दफ्तरों में इस दिन अवकास रहता है और हम अपने मित्रों को गाँधी जयंती की शुभकामनायें देते है अगर आपको भी अपने मित्रों को शुभकामनायें भेजनी हो तो Share बटन पर क्लिक कीजिये !! 

महात्मा गाँधी की जीवनी विस्तार से जानने के लिए यहाँ क्लिक किजिए  महात्मा गाँधी   

Thursday, September 20, 2018

Ambedkar Jayanti

बाबा शाहब डॉ भीमराव आम्बेडकर जी जिन्होनें सामाजिक समता लाने के लिए और सामाजिक भेदभाव को समाज से मिटाने के लिए अपनी पुरे जीवन को एक संघर्स बना लिए तथा जिन्होंने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक संविधान देकर पुरी दुनियां में भारत को गौरवांवित किया आइए जानते है उस महान व्यक्तित्व की संक्षिप्त जीवनी,


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नमस्कार दोस्तों, इस आर्टिकल में सुंदर डिज़ाइन वाले ग्रीटिंग्स को सिर्फ आपके लिए डाल रहा हूँ, इस त्योहार को क्यों मनाते हैं संक्षेप में इस लेख से समझ सकते हैं तथा अपने दोस्तों और परिवार के सभी सदस्यों को बड़ी ही आसानी से ग्रीटिंग्स में अपना नाम लिखकर सेंड कर सकते हैं,  ग्रीटिंग्स भेजने के लिए Share बटन पर क्लिक कीजिए,

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आंबेडकर जयंती


डॉ भीमराव अम्बेडकर जी का जन्म 14 अप्रैल 1891 ई को भारत के मध्य प्रदेश स्थित महू नगर में हुआ था, वे रामजी मालोजी सकपाल और भीमा बाई की 14वीं और अंतिम संतान थे, उनका परिवार मराठी मुल का था, वे हिन्दू महार जाती के थे, उस समय इस जाती के लोगों को छुआछूत के दृष्टी से देखा जाता था जिसके कारण उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से गहरा भेदभाव सहन करना पड़ा, भीमराव अंबेडकर के पूर्वज लम्बे समय से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के सेना में सूबेदार के पद पर कार्यरत थे, उनके बचपन का नाम भीवा था, सात नवम्बर 1900 को रामजी सकपाल ने सातारा की गवर्नमेंट हाई स्कूल में अपने बेटे का नाम भीवा रामजी आंबडवेकर दर्ज कराया था, क्यूंकि उस समय वे आंबडवे गाँव में थे और वहां के लोग अपने गाँव के नाम से उपनाम रखते थे इसलिए उनका उपनाम सकपाल के बजाय आंबडवेकर स्कूल में दर्ज कराया गया बाद में एक ब्राह्मण शिक्षक कृष्णा महादेव आंबेडकर जो उनसे विशेष स्नेह रखते थे उनके नाम से आंबडवेकर हटाकर अपना सरल उपनाम आंबेडकर रख दिए, फिर रामजी सकपाल अपने परिवार के साथ बम्बई चले आए,

15 अप्रैल 1906 को जब भीमराव अंबेडकर लगभग 15 वर्ष के थे तो 9 साल की लड़की रमाबाई से उनका विवाह कराया गया, वे उस समय पांचवे क्लास में पढ़ रहे थे और इन दिनों भारत में बालविवाह का प्रचलन था,
1894 में भीमराव आंबेडकर के पिता सेवा निर्वित हो गये और इसके दो साल बाद आंबेडकर की माँ की भी मृत्यु हो गयी, बच्चों की देखभाल उनकी चाची ने कठिन परिस्तिथियों में की, फिर 1898 में आंबेडकर के पिता रामजी सकपाल ने दूसरी शादी कर ली,

1907 में आंबेडकर ने मैट्रिक परीक्षा पास की उनकी इस सफलता के लिए एक सर्वाजनिक समारोह में उनका सम्मान किया गया और उनके एक शिक्षक कृष्णा जी अर्जुन केलुस्कर ने उन्हें महात्मा बुद्ध की जीवनी का एक किताब भेट किया इस किताब को पढ़ कर उन्हें बौध धर्म अच्छा लगने लगा जिसके कारन उन्होंने बाद में बौध धर्म अपना लिए,

1912 तक, उन्होंने बॉम्बे विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र और राजनीतिक विज्ञान में कला स्नातक (BA) की शिक्षा ली,

1913 में तिन साल के लिए बडौदा राज्य के द्वारा प्रदान छात्रवृति से वे 22 वर्ष की आयु में अमेरिका चले गए और नुयार्क स्थित कोलंबिया विश्वविद्यालय में स्नातकोतर (MA) की डिग्री प्राप्त की,

1916 में, उन्हें अपना दूसरा शोध कार्य, नेशनल डिविडेंड ऑफ इंडिया - ए हिस्टोरिक एंड एनालिटिकल स्टडी के लिए दूसरी कला स्नातकोत्तर प्रदान की गई, और अन्ततः उन्होंने लंदन की राह ली,

फिर 1927 को औपचारिक रूप से कोलम्बिया विश्व विद्यालय से PHD की डिग्री प्राप्त की और 1935 को उन्हें सरकारी लॉ कोलेज के प्रधानाचार्य नियुक्त किया गया, इस पद पर वे दो वर्ष तक रहे,

29 अगस्त 1947को अंबेडकर को स्वतंत्र भारत के नये संविधान के रचना के लिए संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष पद के लिए चुना गया,

बीमार रहने के कारण 1935 में उनकी पत्नी रमा बाई की मृत्यु हो गयी थी इसलिए 15 अप्रैल 1948 को एक ब्राह्मण परिवार की लड़की सारदा कबीर जो की मेडिकल प्रेक्टीस्नर थी, उससे उन्होंने दूसरा विवाह कर लिया और उनका नाम बदलकर सविता अंबेडकर रख दिया,
B.R. Ambedkar

फिर उनके लिखे हुए संविधान को 26 नवम्बर 1949 को भारत के संविधान सभा ने अपना लिया, उन्हें संविधान लिखने में 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन का समय लगा, उसके बाद 26 जनवरी 1950 को भारत में संविधान लागु कर दिया गया जिसे हम भारत में गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं, 6 दिसम्बर 1956 को उनकी मृत्यु हो गई, वे हमारे बीच नहीं रहे पर वे हमारे लिए हमेसा अमर रहेंगे,
बाबा शाहब डॉ भीमराव अम्बेडकर जी अपने जीवन काल में दलितों के उथान के लिए प्रयासरत रहे और भारत में चल रहे चतुर्वर्ण प्रणाली के खिलाफ लड़ते रहे और सामाजिक समता और सामाजिक न्याय के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया, समाज में हो रहे जातिगत भेदभाव के कारण दलितों और अछूतों के साथ हो रहे अत्याचार के खिलाफ कई आन्दोलन किये और छुआछुत खत्म करने तथा मंदिरों में अछूतों के प्रवेश के लिए कई लड़ाइयाँ लड़ी तथा गाँधी द्वारा रचित हरिजन शब्द पुकारने के लिए कौंग्रेस की निंदा की, डॉ भीमराव आंबेडकर ने महिलाओं के लिए व्यापक आर्थिक और सामजिक अधिकारों की वकालत की और अनुसूचित जाती, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए सिविल सेवाओं, स्कूलों और कॉलेजों की नौकरियों में आरक्षण प्रणाली को लागू करवाया, जिससे निचले वर्ग के लोगों को भी समाज में सम्मान से जीने का हक़ मिले, डॉ भीमराव अम्बेडकर जी का जन्म के दिन 14 अप्रैल को भारत के सभी स्कूलों, कॉलेजों और दफ्तरों सहित लगभग 55 देश में अम्बेडकर जयंती मनाया जाता है आइए हम भी इस दिन की शुभकामनाएँ अपने मित्रों को एक डिजिटल ग्रीटिंग्स के रूप में भेजें, ग्रीटिंग्स भेजने के लिए Share बटन पर क्लिक किजिए !!



डॉ भीमराव अंबेडकर ने समाज सेवा करते हुए कई पुस्तकें भी लिखी जैसे :-

  • भारत में जाति: उनकी प्रणाली, उत्पत्ति और विकास,
  • एवोल्युशन ऑफ़ प्रोविंशियल फिनांस इन ब्रिटिश इंडिया
  • जाति के विनाश
  • हु वर ड शुद्राज
  • द अनटचेबल्स: ए थीसिस ऑन द ओरिजन ऑफ़ अनटचेबलिटी
  • थोट्स ऑन पाकिस्तान
  • द बुद्ध एंड हिज धम्म
  • बुद्ध या कार्ल मार्स
                    === जय हिन्द ===

Saturday, September 15, 2018

Happy Diwali

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ 
क्यों मनाते हैं हम दीपावली, क्यों जलाई जाती है पुरे घर में, शहरों में, और गावों में, दीपों की श्रृंखला तथा क्यों की जाती है दीपावली के रात को माँ लक्ष्मी, के साथ श्री गणेश की पूजा दोस्तों यह आर्टिकल इसी विषय पर है, इस आर्टिकल से आपको इन्ही प्रश्नों का उत्तर मिलेगा आप उपरोक्त सभी बातों को जान पाएँगे एकदम कम समय दे कर,

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नमस्कार दोस्तों, इस आर्टिकल में सुंदर डिज़ाइन वाले ग्रीटिंग्स को सिर्फ आपके लिए डाल रहा हूँ, इस त्योहार को क्यों मनाते हैं संक्षेप में इस लेख से समझ सकते हैं तथा अपने दोस्तों और परिवार के सभी सदस्यों को बड़ी ही आसानी से ग्रीटिंग्स में अपना नाम लिखकर सेंड कर सकते हैं,  ग्रीटिंग्स भेजने के लिए Share बटन पर क्लिक कीजिए,

अपने पसंद वाले त्यौहार जैसे शुभ दिपावली, होली, नवरात्र, स्वतंत्रता दिवस, रक्षाबंधन, ईद मुबारक, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, शुभ प्रात और  शुभ शंध्या आदी जैसे त्योहारों के सुंदर ग्रीटिंग्स अपने दोस्तों को शेयर करने के लिए निचे ग्रीन कलर के festival99.epizy.com पर क्लिक किजिए,

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Happy Dipawali
Happy Diwali Digital Greeting
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क्यों मनाते हैं हम दीपावली ?
राजा दशरथ अयोध्या के राजा थे उनके चार पुत्र हुए राम, लक्ष्मण, भरत, और सत्रुघन, राजा दसरथ के तिन पत्नियाँ थीं कौसल्या, कैकई, और सुमित्रा, राम माता कौसल्या के पुत्र थे एवं वे सबसे बड़े थे दुसरे पुत्र भरत की माता कैकई थीं तथा लक्ष्मण एवं सत्रुघन माता सुमित्रा के गर्भ से जन्म लिए थे,

जब महाराज दसरथ को बहुत वर्षों तक पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई तो उन्होनें श्रृंगी ऋषि के मदद से पुत्रकामेष्टि महायज्ञ का अनुष्ठान किया तब उनकी भक्ति से प्रसन्न हो कर अग्निदेव एक पात्र लेकर प्रकट हुए पात्र में महायज्ञ का प्रसाद खीर था अग्निदेव ने प्रसाद महारानी को खिलाने को कहा, महाराज दसरथ ने खीर का दो भाग कर के रानी कौसल्या एवं रानी कैकई को खाने के लिए कहा, पर रानी कौसल्या और रानी कैकई अपने अपने हिस्से का एक एक भाग रानी सुमित्रा को खिला देती हैं इसलिए रानी सुनित्रा के दो पुत्र में से लक्ष्मण का राम के साथ अधिक प्रेम था और सत्रुघन का भरत के साथ ज्यादा स्नेह देखा जाता था, परन्तु चारो भाई का आपस में बहुत स्नेह था,

जब चारो भाइयों की शिक्षा दीक्षा समाप्त हो गई और राम का विवाह महाराज जनक के पुत्री सीता के साथ संपन्न हुई तब महाराज दसरथ ने राम को अयोध्या का राजा बनाने की घोसना की पर मंथरा के बहकावे में आकार कैकई ने महाराज दसरथ से वचन ले लिया की राम को १४ वर्ष का वनवास हो और भरत को राजा बनाया जाए, जैसा की ऊपर मैं बता चूका हूँ की राम के साथ लक्ष्मण का अधिक लगाव था इसलिए जब श्री राम और माता सीता वन जाने लगे तो लक्ष्मण भी बड़े भैया राम और भाभी सीता के सेवा भाव के लिए उनके साथ वन में प्रवास करने के लिए चले गए,

वन में माता सीता को अकेले पाकर रावण हरण कर के लंका ले जाता है, तो श्री राम और लक्ष्मण वानर राज सुग्रीव एवं हनुमान का सहायता लेकर लंका में जाकर रावण के कुल का विनाश कर देते हैं और रावण को मार कर माता सीता को मुक्त कराते हैं, फिर जब सीता को अपने साथ लेकर श्री राम, लक्ष्मण, सुग्रीव, हनुमान, और विभीषण जो की रावण का छोटा भाई था और युद्ध में श्री राम का सहायक रहा था सभी अयोध्या वापस आते हैं,



आश्विन शुक्ल पक्ष दसमी यानि दसहरे के दिन रावण को मार कर श्री राम विजय हुए थे, और जिस दिन श्री राम अयोध्या वापस आए थे वो दिन आश्विन महीनें के कृष्ण पक्ष त्रियोदसी था यह दसहरे के 18 वें दिन आता है, इसी दिन के रात्रि को हम दीपावली मनाते हैं, जब श्री राम अयोध्या में प्रवेश कर रहे थे तो उनके स्वागत में पुरे अयोध्या में अयोध्या वासियों ने दिप जलाकर उनका स्वागत किया था तब से अँधेरे पर उजाले की विजय के रूप में हम सभी लोग दीपों की एक श्रृंखला जलाकर दीपावली पर्व को बड़े हर्षोल्लास से मनाते हैं, माँ लक्ष्मी का पूजन करते हैं और सभी को मिठाइयाँ बाटते है बच्चे पटाखे और फुलझड़ियाँ जला कर खुश होते हैं,

दोस्तों रामायण बहुत लम्बी कथा है इस महाकाब्य की रचना महर्षी बाल्मीकि ने लगभग 6000 हजार वर्ष पूर्व संस्कृत भाषा में की थी इसमें लगभग 2400 श्लोक है फिर गोस्वामी तुलशीदास जी ने इस महाकाब्य को अवधि भाषा में लिखा जिसे हम रामचरित्रमानस के नाम से जानते हैं, मैंने Happy Diwali लेख के लिए कुछ प्रसंगों को बहुत संक्षेप में बताने का प्रयास किया है अगर आप विस्तार से रामायण के बारे में जानना चाहते हैं तो रामायण विकीपीडिया पर क्लिक कीजिए और अगर आप अपने मित्रों को शुभ दीपावली की डिजिटल ग्रीटिंग्स भेजना चाहते हैं तो Share बटन पर क्लिक कीजिए !


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माँ लक्ष्मी के साथ श्री गणेश की पूजा क्यों होती है ?

दीपावली के दिन धन की देवी माता लक्ष्मी की पूजा आराधना की जाती है जिससे हमारे घर मे धन की कमी ना होने पाए और घर में सुख शांति बनी रहे परन्तु माता लक्ष्मी के साथ श्री गणेश की पूजा भी बहुत आवश्यक है, इसे इस प्रकार समझा जा सकता है अगर आप के पास बहुत अधिक धन हो पर आपके पास बिलकुल भी बुद्धि ना हो तो आप धन को अधिक दिनों तक सम्हाल कर नहीं रख सकते और उसे अच्छे कार्यों में खर्च नहीं कर सकते आपका धन या पैसा कुछ ही दिनों में समाप्त हो जाएगा, आपने सुना होगा "जहाँ सुमति तहाँ सम्पति नाना, जहाँ कुमति तहाँ बिपत्ती निधाना " अर्थात जहाँ सुमति, बुद्धि, विवेक, ज्ञान, नहीं होता वहां माता लक्ष्मी नहीं रह सकतीं, लम्बोदर श्री गणेश जी बुद्धि दाता और दुख हरने वाले देवता हैं अतः माता लक्ष्मी के साथ हम भगवान श्री गणेश की पूजा भी करते है जिससे की माता लक्ष्मी हमारे घर को धन से भर दें और उसे सम्हालने के लिए भगवान श्री गणेश हमें बुद्धि देते रहें तभी हमारे दुखों का अंत होगा और हमारे घर की सुख शांति बनी रहेगी !!
                                                                                
                                                     === धन्यवाद ===


Saturday, September 8, 2018

Good Morning, Good Evening, And Good Night,

शुभ प्रातः, शुभ संध्या, और शुभ रात्रि !!
रोज का सुबह और संध्या भी हमारे लिए किसी त्यौहार से कम नहीं है क्योंकि हम हर सुबह और हर शाम को भी वही करते हैं जो हम अन्य त्योहारों में करते हैं पर कैसे इसी विषय पर हमारा यह Article शुभ प्रातः, शुभ संध्या, और शुभ रात्रि है तो आइये जानते हैं !




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नमस्कार दोस्तों, इस आर्टिकल में सुंदर डिज़ाइन वाले ग्रीटिंग्स को सिर्फ आपके लिए डाल रहा हूँ, इस त्योहार को क्यों मनाते हैं संक्षेप में इस लेख से समझ सकते हैं तथा अपने दोस्तों और परिवार के सभी सदस्यों को बड़ी ही आसानी से ग्रीटिंग्स में अपना नाम लिखकर सेंड कर सकते हैं,  ग्रीटिंग्स भेजने के लिए Share बटन पर क्लिक कीजिए,

अपने पसंद वाले त्यौहार जैसे शुभ दिपावली, होली, नवरात्र, स्वतंत्रता दिवस, रक्षाबंधन, ईद मुबारक, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, शुभ प्रात और  शुभ शंध्या आदी जैसे त्योहारों के सुंदर ग्रीटिंग्स अपने दोस्तों को शेयर करने के लिए निचे ग्रीन कलर के festival99.epizy.com पर क्लिक किजिए,

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Good Morning
Good Morning


शुभ प्रातः { Happy Morning }

हम अपने परिवार की खुशी और उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए दिन भर भाग दौड़ करते रहते है और प्रयास करते हैं की अपने परिवार के सभी सदस्यों की जरूरतों की पूर्ति के लिए प्रयाप्त धन अर्जित करें, चाहे हमारा खुद का अपना दुकान हो कोई फैक्ट्री हो या हम किसी ऑफिस में काम करते हों मेहनत तो हम सभी को करना पड़ता है, और जब हम दिन भर के भाग दौड़ और मेहनत से थक जाते हैं तो हमें आराम की जरुरत होती है और तब हमलोग रात में चार से छ: घंटे तक विश्राम करते है, फिर शुबह सूर्योदय के समय हमारी नींद खुलती है तो हम नित कार्यों से निर्वृत होकर स्नान करते है फिर अपने इस्टदेव का स्मरण करते हैं ,धुप, दीप, अगरबत्ती आदि जला कर इश्वर से याचना करते हैं, की हे इश्वर हमारा तथा हमारे परिवार के लिए आज का दिन शुभ और खुशियों भरा हो, फिर हम अपने दिनचर्या मैं लग जाते हैं,

दोस्तों रोज सुबह इतना सब कुछ करना भी हमारे लिए एक त्यौहार से कम नहीं है, इसलिए हमलोग रोज सुबह अपने मित्रों को Good Morning Wish करते हैं क्योंकि हम चाहते हैं कि हमारे मित्रों का भी पूरा दिन सुखद एवं खुशियों भरा हो, तो दोस्तों आप भी अपने मित्रों को Good Morning Wish एक डिजिटल ग्रीटिंग्स के रूप में भेजना चाहते हैं तो ऊपर Share बटन पर क्लिक कीजिए और खुबसूरत सा ग्रीटिंग्स भेज कर अपने मित्र को निंद से जगाइए ताकि उनका पूरा दिन मंगलमय हो जाए !!

शुभ संध्या   { Happy Evening }

दिन भर हमलोग अपनी दिनचर्या में लगे रहते हैं पूरा दिन किये गए कार्यों का परिणाम चाहे जो भी हो हमें उन कार्यों से हमें संतुस्ट होना ही हमारे जीवन को सुखमय बनाता है अगर आप अपने काम से संतुस्ट नहीं हैं तो आप कभी भी खुश नहीं रह पाएंगे इसका एक उदाहरण मैं प्रस्तुत करता हूँ,
Good Morning, Good Evening, And Good Night,
Happy Evening

एक मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा था उस मंदिर के लिए पत्थर तराशा जा रहा था तिन मजदुर नित प्रतिदिन पत्थर तोडने का काम करते थे और शंध्या वापस घर लौट जाते थे,परन्तु उनमें से एक मजदुर बहुत खुश होकर मुस्कुराता हुआ अपने घर आता था और दूसरा मजदुर खुश तो नहीं रहता था पर उसके चेहरे पर काम करने की संतुस्टी नजर आती थी उसके चेहरे से लगता था की पत्थर तोड़ना ही उसका कर्म है, परन्तु तीसरा मजदुर बहुत दुखी मन से अपने घर वापस आता था जैसे की वह अपने जीवन उन पत्थरों के निचे ही दबा कर आया हो, एक दिन एक तपस्वी संन्यासी उसी रास्ते से जा रहे थे जहाँ मंदिर का कार्य चल रहा था उनहोंने एक मजदुर से पूछा की बेटा ये क्या कर रहे हो, उसने झल्लाकर जवाब दिया देख नहीं रहे बाबा अपनी बदकिस्मती को झेल रहा हूँ, फिर उन्होंने दुसरे मजदुर से भी वही सवाल किया, दूसरा मजदुर झल्लाया नहीं वह धीरे से जवाब दिया,  बाबा पत्थर तोड़ रहा हूँ अपने परिवार के भरन पोसन के लिए, दिखाई नहीं देता क्या ? अंत में वही सवाल उन्होंने तीसरे मजदुर के सामनें दोहराया, तीसरा मजदुर बहुत ही विनम्र होकर बोला...बाबा.. सामने मंदिर का कार्य चल रहा है हम उसी के लिए पत्थर तराश रहे हैं, एक ही काम को तीनो मजदूर कर रहे थे, पर कोई खुश था कोई दुखी था, यह उनकी सोच का परिणाम है ।

अब आप समझ गए होंगे की काम चाहे जो भी हो हमें दिल से करनी चाहिए जो भी काम आप करते हैं उसको छोटा नहीं समझना चाहिए और सबसे बड़ी बात हमें उस काम से संतुस्ट होना चाहिए और दिन भर के कार्यों से हमें जो कुछ भी मिले संध्या के समय दिप जला कर इस्वर को धन्यवाद देना चाहिए, और अपने सम्बन्धियों तथा मित्रों को शुभ संध्या { Happy Evening } का सन्देश भेजनी चाहिए, और अब आप शुभ संध्या { Happy Evening } का डिजिटल ग्रीटिंग्स अपने मित्रों को भेजने के लिए ऊपर Share बटन पर क्लिक कीजिए !!

शुभ रात्री { Good Night }
Good Night या शुभ रात्री हम एक दूसरे को इसलिए कहते हैं, कि रात को हमें नींद अच्छी आए, क्योकि आपका अगला दिन खुशनुमा हो इसके लिए आपको कम से कम चार से छः घंटे की निंद लेनी आवस्यक है, इसके लिए हमें अधिकतम नौ बजे तक सो जाना चाहिए प्रातः चार बजे उठ कर फ्रेश होना चाहिए और मॉर्निंग वॉक तथा योग, प्राणायाम करना चाहिए इससे दिनभर हमारी ताजगी बनी रहती है, अब आप अपने मित्रों को Good Night की डिजिटल ग्रिटिंग्स भेजने के लिए नीचे Share बटन पर क्लिक किजीए !!
Good Morning, Good Evening, And Good Night,
Good Night
==== शुभ रात्री ====