Thursday, September 20, 2018

Ambedkar Jayanti

बाबा शाहब डॉ भीमराव आम्बेडकर जी जिन्होनें सामाजिक समता लाने के लिए और सामाजिक भेदभाव को समाज से मिटाने के लिए अपनी पुरे जीवन को एक संघर्स बना लिए तथा जिन्होंने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक संविधान देकर पुरी दुनियां में भारत को गौरवांवित किया आइए जानते है उस महान व्यक्तित्व की संक्षिप्त जीवनी,


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नमस्कार दोस्तों, इस आर्टिकल में सुंदर डिज़ाइन वाले ग्रीटिंग्स को सिर्फ आपके लिए डाल रहा हूँ, इस त्योहार को क्यों मनाते हैं संक्षेप में इस लेख से समझ सकते हैं तथा अपने दोस्तों और परिवार के सभी सदस्यों को बड़ी ही आसानी से ग्रीटिंग्स में अपना नाम लिखकर सेंड कर सकते हैं,  ग्रीटिंग्स भेजने के लिए Share बटन पर क्लिक कीजिए,

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आंबेडकर जयंती


डॉ भीमराव अम्बेडकर जी का जन्म 14 अप्रैल 1891 ई को भारत के मध्य प्रदेश स्थित महू नगर में हुआ था, वे रामजी मालोजी सकपाल और भीमा बाई की 14वीं और अंतिम संतान थे, उनका परिवार मराठी मुल का था, वे हिन्दू महार जाती के थे, उस समय इस जाती के लोगों को छुआछूत के दृष्टी से देखा जाता था जिसके कारण उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से गहरा भेदभाव सहन करना पड़ा, भीमराव अंबेडकर के पूर्वज लम्बे समय से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के सेना में सूबेदार के पद पर कार्यरत थे, उनके बचपन का नाम भीवा था, सात नवम्बर 1900 को रामजी सकपाल ने सातारा की गवर्नमेंट हाई स्कूल में अपने बेटे का नाम भीवा रामजी आंबडवेकर दर्ज कराया था, क्यूंकि उस समय वे आंबडवे गाँव में थे और वहां के लोग अपने गाँव के नाम से उपनाम रखते थे इसलिए उनका उपनाम सकपाल के बजाय आंबडवेकर स्कूल में दर्ज कराया गया बाद में एक ब्राह्मण शिक्षक कृष्णा महादेव आंबेडकर जो उनसे विशेष स्नेह रखते थे उनके नाम से आंबडवेकर हटाकर अपना सरल उपनाम आंबेडकर रख दिए, फिर रामजी सकपाल अपने परिवार के साथ बम्बई चले आए,

15 अप्रैल 1906 को जब भीमराव अंबेडकर लगभग 15 वर्ष के थे तो 9 साल की लड़की रमाबाई से उनका विवाह कराया गया, वे उस समय पांचवे क्लास में पढ़ रहे थे और इन दिनों भारत में बालविवाह का प्रचलन था,
1894 में भीमराव आंबेडकर के पिता सेवा निर्वित हो गये और इसके दो साल बाद आंबेडकर की माँ की भी मृत्यु हो गयी, बच्चों की देखभाल उनकी चाची ने कठिन परिस्तिथियों में की, फिर 1898 में आंबेडकर के पिता रामजी सकपाल ने दूसरी शादी कर ली,

1907 में आंबेडकर ने मैट्रिक परीक्षा पास की उनकी इस सफलता के लिए एक सर्वाजनिक समारोह में उनका सम्मान किया गया और उनके एक शिक्षक कृष्णा जी अर्जुन केलुस्कर ने उन्हें महात्मा बुद्ध की जीवनी का एक किताब भेट किया इस किताब को पढ़ कर उन्हें बौध धर्म अच्छा लगने लगा जिसके कारन उन्होंने बाद में बौध धर्म अपना लिए,

1913 में तिन साल के लिए बडौदा राज्य के द्वारा प्रदान छात्रवृति से वे 22 वर्ष की आयु में अमेरिका चले गए और नुयार्क स्थित कोलंबिया विश्वविद्यालय में स्नातकोतर (BA) की डिग्री प्राप्त की,
1916 में वे पढाई के लिए लन्दन चले गये और वहां MA और BSc की डिग्री प्राप्त की,

फिर 1927 को औपचारिक रूप से कोलम्बिया विश्व विद्यालय से PHD की डिग्री प्राप्त की और 1935 को उन्हें सरकारी लॉ कोलेज के प्रधानाचार्य नियुक्त किया गया, इस पद पर वे दो वर्ष तक रहे,

29 अगस्त 1947को अंबेडकर को स्वतंत्र भारत के नये संविधान के रचना के लिए संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष पद के लिए चुना गया,

बीमार रहने के कारण 1935 में उनकी पत्नी रमा बाई की मृत्यु हो गयी थी इसलिए 15 अप्रैल 1948 को एक ब्राह्मण परिवार की लड़की सारदा कबीर जो की मेडिकल प्रेक्टीस्नर थी, उससे उन्होंने दूसरा विवाह कर लिया और उनका नाम बदलकर सविता अंबेडकर रख दिया,
B.R. Ambedkar

फिर उनके लिखे हुए संविधान को 26 नवम्बर 1949 को भारत के संविधान सभा ने अपना लिया, उन्हें संविधान लिखने में 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन का समय लगा, उसके बाद 26 जनवरी 1950 को भारत में संविधान लागु कर दिया गया जिसे हम भारत में गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं, 6 दिसम्बर 1956 को उनकी मृत्यु हो गई, वे हमारे बीच नहीं रहे पर वे हमारे लिए हमेसा अमर रहेंगे,
बाबा शाहब डॉ भीमराव अम्बेडकर जी अपने जीवन काल में दलितों के उथान के लिए प्रयासरत रहे और भारत में चल रहे चतुर्वर्ण प्रणाली के खिलाफ लड़ते रहे और सामाजिक समता और सामाजिक न्याय के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया, समाज में हो रहे जातिगत भेदभाव के कारण दलितों और अछूतों के साथ हो रहे अत्याचार के खिलाफ कई आन्दोलन किये और छुआछुत खत्म करने तथा मंदिरों में अछूतों के प्रवेश के लिए कई लड़ाइयाँ लड़ी तथा गाँधी द्वारा रचित हरिजन शब्द पुकारने के लिए कौंग्रेस की निंदा की, डॉ भीमराव आंबेडकर ने महिलाओं के लिए व्यापक आर्थिक और सामजिक अधिकारों की वकालत की और अनुसूचित जाती, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए सिविल सेवाओं, स्कूलों और कॉलेजों की नौकरियों में आरक्षण प्रणाली को लागू करवाया, जिससे निचले वर्ग के लोगों को भी समाज में सम्मान से जीने का हक़ मिले, डॉ भीमराव अम्बेडकर जी का जन्म के दिन 14 अप्रैल को भारत के सभी स्कूलों, कॉलेजों और दफ्तरों सहित लगभग 55 देश में अम्बेडकर जयंती मनाया जाता है आइए हम भी इस दिन की शुभकामनाएँ अपने मित्रों को एक डिजिटल ग्रीटिंग्स के रूप में भेजें, ग्रीटिंग्स भेजने के लिए Share बटन पर क्लिक किजिए !!



डॉ भीमराव अंबेडकर ने समाज सेवा करते हुए कई पुस्तकें भी लिखी जैसे :-

  • भारत में जाति: उनकी प्रणाली, उत्पत्ति और विकास,
  • एवोल्युशन ऑफ़ प्रोविंशियल फिनांस इन ब्रिटिश इंडिया
  • जाति के विनाश
  • हु वर ड शुद्राज
  • द अनटचेबल्स: ए थीसिस ऑन द ओरिजन ऑफ़ अनटचेबलिटी
  • थोट्स ऑन पाकिस्तान
  • द बुद्ध एंड हिज धम्म
  • बुद्ध या कार्ल मार्स
                    === जय हिन्द ===

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